Purushottam Ki Padyatra
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Description
जीवन में पुरुषोत्तम की यात्रा आसान नहीं होती है। मानव जीवन में शिखर पर पहुँचने के लिए पदयात्रा करनी होती है। श्रीराम के जीवन को ध्यान से देखिए उन्होंने कभी खुद को अवतार कौन कहे, पुरुषोत्तम के रूप में भी प्रस्तुत नहीं किया। वे सदैव जीवन की जटिलताओं के बीच खड़े एक आम मानव की तरह चलते हैं, सामान्य लोगों के साथ बराबरी का संबंध बनाते हैं। पुरुषोत्तम की पदयात्रा को जिस प्रकार श्रीराम ने अपने विचार और विवेक के धरातल पर सहज बनाया, वह आज अनुकरणीय बने– वैज्ञानिक चेतना के आधार पर मौलिक विचारों के प्रकटीकरण तथा विचार और विवेक के साथ अध्यात्म में प्रवेश करने की सरल यात्रा करवाती है यह पुस्तक “पुरुषोत्तम की पदयात्रा’। इसके लिए अंतर्यात्रा आवश्यक है । रामायण में वर्णन है कि विश्वमित्र के साथ भेजने के निर्णय के पश्चात्] दशरथजी ने श्रीराम को बुलाकर पूछा कि वह आजकल सब कामों के प्रति उदासीन क्]यों हैं ? राम कहते हैं कि जीवन में आदमी जो कुछ भी करता है, वह अंतत क्षणिक परिणामों वाला तथा मृत्यु की ओर जानेवाला होता है। जीवन में कहीं किसी बात की कोई स्थायी उपलब्धि नहीं है; धन, यश, बल और पद–सभी के अपने अंतर्विरोध हैं। भला कोई विवेकशील प्राणी क्]यों इन कî
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Additional information
| Weight | 0.55 lbs |
|---|---|
| Dimensions | 8.5 × 5.5 × 0.4 in |
| Author(s) | Mayank Murari |
| Publisher | Prabhat Prakashan Pvt Ltd |
| Pages | 192 |
Vendor Information
- Store Name: Ingram
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